आरती देवी कूष्माण्डा जी – Devi Kushmanda Aarti
देवी कूष्मांडा, देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप की अधिष्ठात्री हैं। इन्हें "आदिशक्ति" कहा जाता है क्योंकि ब्रह्मांड की उत्पत्ति इनके मधुर मुस्कान से हुई थी। देवी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी…
देवी कूष्मांडा, देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप की अधिष्ठात्री हैं। इन्हें "आदिशक्ति" कहा जाता है क्योंकि ब्रह्मांड की उत्पत्ति इनके मधुर मुस्कान से हुई थी। देवी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी…
सिद्धिदात्री माता, देवी दुर्गा के नवें और अंतिम स्वरूप की अधिष्ठात्री हैं। नवरात्रि के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। "सिद्धिदात्री" का अर्थ है "सिद्धियों को प्रदान करने वाली"।…
महा गौरी माता, देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप का प्रतीक हैं। नवरात्रि के आठवें दिन इनकी पूजा की जाती है। इनका स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और पवित्र है। महा गौरी…
कालरात्रि माता, देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप की अधिष्ठात्री हैं। नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा की जाती है। माता का यह स्वरूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली है, जो सभी…
शैलपुत्री माता, देवी दुर्गा के पहले स्वरूप का प्रतीक हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन इनकी पूजा की जाती है। "शैल" का अर्थ पर्वत होता है, और शैलराज हिमालय की पुत्री…
कात्यायनी देवी की आरती विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। वे शक्ति और विजय की प्रतीक हैं। उनकी आरती, "जय जय अम्बे जय कात्यायनी माता," का पाठ…
स्कंदमाता, देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप के रूप में पूजित हैं। वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और अपनी गोद में स्कंद को धारण किए हुए हैं। माता का…