इस समय शुभ कार्य वर्जित है।
धन निवेश और यात्रा से बचें।
नए कार्य के लिए शुभ।
राहु काल (Rahu Kaal) वैदिक ज्योतिष में दिन का वह समय माना जाता है जो राहु ग्रह के आधिपत्य में होता है। राहु को एक छाया ग्रह और पाप ग्रह माना गया है, जो भ्रम और बाधाएं पैदा करता है। इसलिए, हिंदू धर्म में मान्यता है कि राहु काल के दौरान शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य—जैसे विवाह, नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, या लंबी यात्रा—सफल नहीं होता या उसमें विघ्न आते हैं।
राहु काल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट (डेढ़ घंटे) के लिए होता है। यह समय निश्चित नहीं होता, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय और सप्ताह के दिन (वार) पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, रविवार को राहु काल शाम को होता है, जबकि सोमवार को सुबह। दक्षिण भारत में लोग राहु काल (Rahu Kalam) को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं और इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कागज पर हस्ताक्षर भी नहीं करते।
राहु काल के अलावा, यमगंडा भी एक अशुभ समय है जो केतु ग्रह से संबंधित है। इसमें धन का निवेश या यात्रा करने से नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, गुलिक काल शनि देव के पुत्र गुलिक का समय है। ज्योतिष के अनुसार, गुलिक काल में किया गया कार्य बार-बार करना पड़ता है, इसलिए यह शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है (जैसे घर का निर्माण शुरू करना) लेकिन अंतिम संस्कार जैसे कार्यों के लिए वर्जित है।
चूंकि राहु काल की गणना सूर्योदय से होती है, इसलिए दिल्ली और मुंबई के राहु काल में 20-30 मिनट का अंतर हो सकता है। हमारी वेबसाइट BhagwatGeeta Tools आपके द्वारा चुने गए शहर के अक्षांश (Latitude) के आधार पर 2025 का सबसे सटीक समय बताती है। हमारा 'लाइव स्टेटस' फीचर आपको तुरंत बता देता है कि क्या अभी का समय सुरक्षित है या नहीं।