Bhagwat Geeta PDF in Hindi – श्रीमद्भगवद गीता का सार

श्रीमद्भगवद गीता का सार: आधुनिक जीवन में सुख, शांति और सफलता के सूत्र श्रीमद्भगवद गीता केवल एक प्राचीन धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शिका…

Continue ReadingBhagwat Geeta PDF in Hindi – श्रीमद्भगवद गीता का सार

Bhagavad Gita Pdf in Hindi – श्री मद भगवत गीता पीडीएफ

भगवद गीता  (Shri Mad Bhagwat Geeta PDF) श्रीमद्भगवद गीता केवल एक धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की और जीवन के गूढ़ रहस्यों को सुलझाने वाली एक अमूल्य धरोहर है। महाभारत…

Continue ReadingBhagavad Gita Pdf in Hindi – श्री मद भगवत गीता पीडीएफ

Bhagwat Geeta पढ़ने के नियम, फायदे और सही तरीका

  भगवद् गीता पढ़ने के नियम, लाभ, सही तरीका और उचित समय भगवद् गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन-दर्शन, कर्तव्य, कर्म, भक्ति और आत्म-ज्ञान का संपूर्ण मार्गदर्शक…

Continue ReadingBhagwat Geeta पढ़ने के नियम, फायदे और सही तरीका

सत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

सत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…

Continue Readingसत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

अठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग- श्रीमद् भगवदगीता

अठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग इसमें गीता के समस्त उपदेशों का सार एवं उपसंहार है। यहाँ पुन: बलपूर्वक मानव जीवन के लिए तीन गुणों का महत्व कहा गया है। पृथ्वी के मानवों…

Continue Readingअठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग- श्रीमद् भगवदगीता

Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi – श्रीमद भागवत गीता

हाल ही में महाभारत युद्ध की शुरुआत के समय गुरु कृष्ण द्वारा अर्जुन मेले में दिया गया उपदेश श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से मनाया जाता है। यह महाभारत के भीष्म पर्व…

Continue ReadingShrimad Bhagwat Geeta in Hindi – श्रीमद भागवत गीता

सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…

Continue Readingसोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग- श्रीमद् भगवदगीता

पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग इसमें विश्व का अश्वत्थ के रूप में वर्णन किया गया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तारवाला है। देश और काल में इसका कोई अंत नहीं है।…

Continue Readingपंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या…

Continue Readingचौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

तेरहवाँ अध्यायः क्षेत्रक्षत्रज्ञविभागयोग- श्रीमद्भगवदगीता

तेरहवाँ अध्यायः क्षेत्रक्षत्रज्ञविभागयोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 13 का तेरहवाँ अध्याय, जिसे 'क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग' कहा जाता है, आत्म-ज्ञान का मूल आधार है। इस अध्याय में भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन…

Continue Readingतेरहवाँ अध्यायः क्षेत्रक्षत्रज्ञविभागयोग- श्रीमद्भगवदगीता

बारहवाँ अध्यायः भक्तियोग- श्रीमद् भगवदगीता

श्रीमद् भगवदगीता बारहवाँ अध्याय: भक्तियोग (Bhakti Yoga) Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 12 का बारहवाँ अध्याय, जिसे 'भक्तियोग' (Bhakti Yoga) कहा जाता है, ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुगम और मधुर मार्ग…

Continue Readingबारहवाँ अध्यायः भक्तियोग- श्रीमद् भगवदगीता

End of content

No more pages to load