करण (Karan) पंचांग का वह महत्वपूर्ण अंग है जो क्रिया (Action) और सफलता (Success) से जुड़ा है। एक तिथि में दो करण होते हैं: एक पूर्वार्ध में और दूसरा उत्तरार्ध में। कुल 11 करण हैं, जिनमें से 7 चर (Movable) और 4 स्थिर (Fixed) होते हैं। हर करण का अपना एक विशेष प्रतीक (पशु) और स्वामी होता है।
'विष्टि' करण को ही ज्योतिष में भद्रा कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। भद्रा काल में किया गया कोई भी शुभ कार्य (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन) सफल नहीं होता और उसमें विघ्न आते हैं। हालांकि, भद्रा काल में तंत्र-मंत्र, शत्रु दमन और कानूनी कार्यों के लिए सफलता मिल सकती है।
हमारा टूल दिल्ली के समय अनुसार यह गणना करता है कि अभी कौन सा करण चल रहा है और क्या भद्रा का प्रभाव है या नहीं। 2025 में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले 'भद्रा चेक' अवश्य करें।