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आज का पंचांग (Delhi)

🌅 सूर्योदय - सूर्यास्त

06:20 AM
सूर्यास्त: 06:45 PM

📅 आज की तिथि

शुक्ल पक्ष - द्वादशी
समाप्ति: 04:30 PM

✨ नक्षत्र

रोहिणी
स्वामी: चंद्र

🧘 योग

सिद्ध
शुभ योग

⚠️ राहु काल

10:30 AM - 12:00 PM
अशुभ समय

🦁 करण

बव
चर करण

आज का पंचांग: विस्तृत जानकारी और महत्व

पंचांग (Panchang) हिंदू काल गणना की वह प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति है जो हमें प्रतिदिन के शुभ और अशुभ समय का ज्ञान कराती है। 'पंचांग' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है: 'पंच' अर्थात पाँच और 'अंग' अर्थात भाग। ये पाँच अंग हैं - तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। भारतीय संस्कृति में किसी भी मांगलिक कार्य, जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय शुरू करने से पहले पंचांग देखने की परंपरा सदियों पुरानी है।

1. तिथि (Tithi) - चंद्र दिन

चंद्रमा की कलाओं के आधार पर तिथि का निर्धारण होता है। सूर्य और चंद्रमा के बीच के अंतर को तिथि कहते हैं। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जिन्हें दो पक्षों में बांटा गया है: शुक्ल पक्ष (जब चंद्रमा बढ़ता है) और कृष्ण पक्ष (जब चंद्रमा घटता है)। आज की तिथि का ज्ञान होना इसलिए आवश्यक है क्योंकि अधिकांश हिंदू त्यौहार और व्रत तिथियों पर ही आधारित होते हैं।

2. नक्षत्र (Nakshatra) - तारों का समूह

आकाश मंडल को 27 बराबर भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है। चंद्रमा प्रतिदिन लगभग एक नक्षत्र पार करता है। ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्र का बहुत महत्व है क्योंकि जातक का जन्म जिस नक्षत्र में होता है, वही उसका 'जन्म नक्षत्र' कहलाता है और उसी के आधार पर उसकी राशि और स्वभाव तय होते हैं।

3. योग (Yoga) - आध्यात्मिक संयोग

सूर्य और चंद्रमा के स्पष्ट भोगांशों (Longitudes) के योग से जो स्थिति बनती है, उसे योग कहते हैं। कुल 27 योग होते हैं। इनमें से कुछ योग जैसे 'सिद्ध', 'साध्य' और 'शुभ' कार्यों के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं, जबकि 'व्यतीपात' और 'वैधृति' जैसे योगों में शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

4. करण (Karana) - क्रिया का आधार

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। इस प्रकार एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण होते हैं, जिनमें से 'विष्टि' करण को भद्रा कहा जाता है। भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

5. वार (Vara) - सप्ताह का दिन

एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक के समय को वार कहते हैं। सात वार सात ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) का प्रतिनिधित्व करते हैं।

स्थान आधारित गणना का महत्व

अक्सर लोग कैलेंडर में छपा हुआ पंचांग देख लेते हैं, लेकिन वह सटीक नहीं होता। पंचांग हमेशा स्थान-आधारित (Location Based) होना चाहिए। उदाहरण के लिए, दिल्ली में सूर्योदय का समय मुंबई से अलग होगा। सूर्योदय बदलने से तिथि और नक्षत्र की समाप्ति का समय भी बदल जाता है। हमारी वेबसाइट BhagwatGeeta Tools आपको आपके चयनित शहर (जैसे दिल्ली) के अक्षांश और देशांतर (Latitude & Longitude) के आधार पर 100% सटीक गणना प्रदान करती है।

इसलिए, जब भी आप कोई महत्वपूर्ण कार्य करें, तो जेनेरिक कैलेंडर के बजाय हमारे डिजिटल पंचांग का उपयोग करें जो 2025 के लिए अपडेटेड है।