नक्षत्र (Nakshatra) भारतीय वैदिक ज्योतिष का आधार स्तंभ है। आकाश मंडल (Zodiac) को 360 डिग्री में माना गया है, जिसे 27 बराबर भागों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक भाग 13 डिग्री 20 मिनट का होता है, जिसे 'नक्षत्र' कहते हैं। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते समय प्रतिदिन लगभग एक नक्षत्र पार करता है। जातक का जन्म जिस समय होता है, उस समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही उसका 'जन्म नक्षत्र' कहलाता है।
हिंदू धर्म में बच्चे का नामकरण उसके जन्म नक्षत्र के आधार पर ही किया जाता है। प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं और हर चरण का एक विशेष अक्षर होता है। जैसे 'रोहिणी' नक्षत्र के लिए 'ओ, वा, वी, वू' अक्षर निर्धारित हैं। सही नक्षत्र अक्षर से नाम रखने पर बच्चे के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हमारा टूल आपको आज के नक्षत्र के अनुसार शुभ अक्षर बताता है।
27 नक्षत्रों में से 6 नक्षत्र ऐसे हैं जिन्हें गंडमूल नक्षत्र (Gandmool Nakshatra) कहा जाता है। ये हैं: अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। यदि किसी शिशु का जन्म इन नक्षत्रों में होता है, तो इसे स्वास्थ्य और पिता के लिए कष्टकारी माना जाता है। ऐसे में जन्म के 27वें दिन जब वही नक्षत्र दोबारा आता है, तो 'गंडमूल शांति पूजा' करवाना आवश्यक होता है। हमारी वेबसाइट आपको तुरंत अलर्ट करती है कि क्या आज का नक्षत्र गंडमूल है या नहीं।
नक्षत्र के आधार पर बच्चे का 'पाया' (सोना, चांदी, तांबा, लोहा) निर्धारित होता है। जैसे 'स्वर्ण पाद' को थोड़ा कष्टकारी लेकिन धन के लिए अच्छा माना जाता है, जबकि 'रजत पाद' (चांदी) को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार आज की सटीक जानकारी यहाँ प्राप्त करें और अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लें।