Shri Kamala Yantra
कमला यंत्र पूजा 1. Yantroddhara (यन्त्रोद्धार) पूजा के लिए सही यंत्र का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है। सही यंत्र के बिना, यंत्र पूजा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। यंत्र पूजा के…
कमला यंत्र पूजा 1. Yantroddhara (यन्त्रोद्धार) पूजा के लिए सही यंत्र का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है। सही यंत्र के बिना, यंत्र पूजा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। यंत्र पूजा के…
कात्यायनी देवी की आरती विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन की जाती है। वे शक्ति और विजय की प्रतीक हैं। उनकी आरती, "जय जय अम्बे जय कात्यायनी माता," का पाठ…
स्कंदमाता, देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप के रूप में पूजित हैं। वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और अपनी गोद में स्कंद को धारण किए हुए हैं। माता का…
चंद्रघंटा माता, देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरा स्वरूप हैं। इनकी आरती, "जय माँ चंद्रघंटा सुख धाम, पूर्ण कीजो मेरे काम," का गायन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और…
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥. महालक्ष्मी यंत्र पूजा 1. Yantroddhara (यन्त्रोद्धार) पूजा के लिए सही यंत्र का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है।…
श्री कुबेर यंत्र के फायदे वित्तीय स्थिरता लाने और वित्तीय बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। कुबेर यंत्र व्यापार वृद्धि और सफलता के लिए फायदेमंद है। घर परिवार…
श्री लक्ष्मी गणेश यंत्र के फायदे धन और समृद्धि: लक्ष्मी यंत्र का प्राथमिक उद्देश्य धन और वित्तीय प्रचुरता को आकर्षित करना है। लक्ष्मी गणेश यंत्र धन और समृद्धि का आकर्षण…
श्री सूक्त स्तोत्र सोलह श्लोकों से बना है और श्री सूक्त आवरण पूजा के दौरान सभी श्लोकों का जाप किया जाता है। श्री सूक्त यंत्र पूजा को नौ अवरणों में…
श्री व्यापार वृद्धि यंत्र के फायदे विशेष रूप से व्यवसाय की वृद्धि, बिक्री और लाभप्रदता को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ग्राहकों को आकर्षित करता है, प्रतिष्ठा…
Ahoi Mata ki Arti Jai Ahoi Mata Maiya Jai Ahoi Mata जय अहोई माता, जय अहोई माता । तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय अहोई माता ॥…
भगवान कुबेर धन और समृद्धि के देवता माने जाते हैं। उनकी आरती, "जय कुबेर जगत के रक्षक," का नियमित गायन धन-धान्य, ऐश्वर्य और समृद्धि का आशीर्वाद देता है। कुबेर भगवान…
भगवान नरसिंह, विष्णु जी के उग्र अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए हिरण्यकशिपु का वध किया। उनकी आरती, "जय जय नरसिंह देवा," भक्तों के…