Shree Surya Kavach – श्री सूर्य कवच
सूर्य कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। "कवच" का अर्थ है "रक्षा कवच," जो व्यक्ति को रोग,…
सूर्य कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। "कवच" का अर्थ है "रक्षा कवच," जो व्यक्ति को रोग,…
अमोघ शिव कवच के लाभ धर्म शास्त्रों के अनुसार अमोघ शिव कवच का पाठ करने से समस्त प्रकार के शारीरिक ,मानसिक ,आर्थिक एवं सामाजिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. अमोघ…
सूर्य कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। "कवच" का अर्थ है "रक्षा कवच," जो व्यक्ति को रोग,…
कामाख्या देवी कवच एक पवित्र स्तोत्र है, जो माँ कामाख्या देवी की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। माँ कामाख्या को तांत्रिक साधना और शक्ति की…
शिव कवच एक पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान शिव की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। भगवान शिव, जिन्हें "महादेव" और "संहारकर्ता" के रूप…
दुर्गा देवी कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो माँ दुर्गा की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। माँ दुर्गा को शक्ति, साहस, और विजय की देवी…
हाल ही में महाभारत युद्ध की शुरुआत के समय गुरु कृष्ण द्वारा अर्जुन मेले में दिया गया उपदेश श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से मनाया जाता है। यह महाभारत के भीष्म पर्व…
अठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग इसमें गीता के समस्त उपदेशों का सार एवं उपसंहार है। यहाँ पुन: बलपूर्वक मानव जीवन के लिए तीन गुणों का महत्व कहा गया है। पृथ्वी के मानवों…
सत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…
सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…
पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग इसमें विश्व का अश्वत्थ के रूप में वर्णन किया गया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तारवाला है। देश और काल में इसका कोई अंत नहीं है।…
चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या…