Shree Surya Kavach – श्री सूर्य कवच

सूर्य कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। "कवच" का अर्थ है "रक्षा कवच," जो व्यक्ति को रोग,…

Continue ReadingShree Surya Kavach – श्री सूर्य कवच

अमोघ शिव कवच – Shiv Kavach

अमोघ शिव कवच के लाभ धर्म शास्त्रों के अनुसार अमोघ शिव कवच का पाठ करने से समस्त प्रकार के शारीरिक ,मानसिक ,आर्थिक एवं सामाजिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. अमोघ…

Continue Readingअमोघ शिव कवच – Shiv Kavach

श्री लक्ष्मी कवचम् – Laxmi Kavach

सूर्य कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान सूर्य की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। "कवच" का अर्थ है "रक्षा कवच," जो व्यक्ति को रोग,…

Continue Readingश्री लक्ष्मी कवचम् – Laxmi Kavach

Kamakhya Kavach Hindi माँ कामाख्या देवी कवच

कामाख्या देवी कवच एक पवित्र स्तोत्र है, जो माँ कामाख्या देवी की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। माँ कामाख्या को तांत्रिक साधना और शक्ति की…

Continue ReadingKamakhya Kavach Hindi माँ कामाख्या देवी कवच

Shiva Kavach | शिव कवच

शिव कवच एक पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भगवान शिव की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। भगवान शिव, जिन्हें "महादेव" और "संहारकर्ता" के रूप…

Continue ReadingShiva Kavach | शिव कवच

दुर्गा कवच – Durga Kavach

दुर्गा देवी कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो माँ दुर्गा की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। माँ दुर्गा को शक्ति, साहस, और विजय की देवी…

Continue Readingदुर्गा कवच – Durga Kavach

Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi – श्रीमद भागवत गीता

हाल ही में महाभारत युद्ध की शुरुआत के समय गुरु कृष्ण द्वारा अर्जुन मेले में दिया गया उपदेश श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से मनाया जाता है। यह महाभारत के भीष्म पर्व…

Continue ReadingShrimad Bhagwat Geeta in Hindi – श्रीमद भागवत गीता

अठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग- श्रीमद् भगवदगीता

अठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग इसमें गीता के समस्त उपदेशों का सार एवं उपसंहार है। यहाँ पुन: बलपूर्वक मानव जीवन के लिए तीन गुणों का महत्व कहा गया है। पृथ्वी के मानवों…

Continue Readingअठारहवाँ अध्यायः मोक्षसंन्यासयोग- श्रीमद् भगवदगीता

सत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

सत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…

Continue Readingसत्रहवाँ अध्यायः श्रद्धात्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…

Continue Readingसोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग- श्रीमद् भगवदगीता

पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग इसमें विश्व का अश्वत्थ के रूप में वर्णन किया गया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तारवाला है। देश और काल में इसका कोई अंत नहीं है।…

Continue Readingपंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या…

Continue Readingचौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

End of content

No more pages to load