Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi – श्रीमद भागवत गीता

हाल ही में महाभारत युद्ध की शुरुआत के समय गुरु कृष्ण द्वारा अर्जुन मेले में दिया गया उपदेश श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से मनाया जाता है। यह महाभारत के भीष्म पर्व…

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पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग- श्रीमद् भगवदगीता

पंद्रहवाँ अध्यायः पुरुषोत्तमयोग इसमें विश्व का अश्वत्थ के रूप में वर्णन किया गया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तारवाला है। देश और काल में इसका कोई अंत नहीं है।…

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चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या…

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तेरहवाँ अध्यायः क्षेत्रक्षत्रज्ञविभागयोग- श्रीमद्भगवदगीता

तेरहवाँ अध्यायः क्षेत्रक्षत्रज्ञविभागयोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 13 का तेरहवाँ अध्याय, जिसे 'क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग' कहा जाता है, आत्म-ज्ञान का मूल आधार है। इस अध्याय में भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन…

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बारहवाँ अध्यायः भक्तियोग- श्रीमद् भगवदगीता

श्रीमद् भगवदगीता बारहवाँ अध्याय: भक्तियोग (Bhakti Yoga) Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 12 का बारहवाँ अध्याय, जिसे 'भक्तियोग' (Bhakti Yoga) कहा जाता है, ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुगम और मधुर मार्ग…

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ग्यारहवाँ अध्यायः विश्वरूपदर्शनयोग- श्रीमद् भगवदगीता

ग्यारहवाँ अध्यायः विश्वरूपदर्शनयोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 11 अर्जुन ने भगवान का विश्वरूप देखा। विराट रूप का अर्थ है मानवीय धरातल और परिधि के ऊपर जो अनंत विश्व का प्राणवंत…

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दसवाँ अध्यायः विभूतियोग- श्रीमद् भगवदगीता

दसवाँ अध्यायः विभूतियोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 10 का नाम विभूतियोग है। इसका सार यह है कि लोक में जितने देवता हैं, सब एक ही भगवान, की विभूतियाँ हैं, मनुष्य के…

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नौवाँ अध्यायः राजविद्याराजगुह्ययोग | Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 9

नौवाँ अध्यायः राजविद्याराजगुह्ययोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 9 यह अध्यात्म विद्या विद्याराज्ञी है और यह गुह्य ज्ञान सबमें श्रेष्ठ है। राजा शब्द का एक अर्थ मन भी था। अतएव मन…

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आठवाँ अध्यायः अक्षरब्रह्मयोग- श्रीमद्भगवदगीता

आठवाँ अध्यायः अक्षरब्रह्मयोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 8 में उस अक्षरविद्या का सार कह दिया गया है-अक्षर ब्रह्म परमं, अर्थात् परब्रह्म की संज्ञा अक्षर है। मनुष्य, अर्थात् जीव और शरीर…

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पाँचवाँ अध्यायः कर्मसंन्यासयोग- श्रीमद् भगवदगीता

पाँचवाँ अध्यायः कर्मसंन्यासयोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 5 कर्मसंन्यास योग नामक में फिर वे ही युक्तियाँ और दृढ़ रूप में कहीं गई हैं। इसमें कर्म के साथ जो मन का…

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चौथा अध्याय: ज्ञानकर्मसन्यासयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौथा अध्याय: ज्ञानकर्मसन्यासयोग Bhagwat Geeta Adhyay 4 में, जिसका नाम ज्ञान-कर्म-संन्यास-योग है, यह बाताया गया है कि ज्ञान प्राप्त करके कर्म करते हुए भी कर्मसंन्यास का फल किस उपाय से…

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तीसरा अध्यायः कर्मयोग- श्रीमद् भगवदगीता

तीसरा अध्यायः कर्मयोग इस प्रकार सांख्य की व्याख्या का उत्तर सुनकर कर्मयोग नामक Bhagwat Geeta Adhyay 3 में अर्जुन ने इस विषय में और गहरा उतरने के लिए स्पष्ट प्रश्न…

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