चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता

चौदहवाँ अध्यायः गुणत्रयविभागयोग यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या…

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छठा अध्यायः आत्मसंयमयोग- श्रीमद् भगवदगीता

छठा अध्यायः आत्मसंयमयोग Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 6 आत्मसंयमयोग है जिसका विषय नाम से ही प्रकट है। जितने विषय हैं उन सबसे इंद्रियों का संयम-यही कर्म और ज्ञान का निचोड़…

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दूसरा अध्याय- सांख्ययोग ~ श्रीमद्भगवद्‌गीता

दूसरा अध्यायः सांख्ययोग Bhagwat Geeta Adhyay 2 का नाम सांख्ययोग है। इसमें जीवन की दो प्राचीन संमानित परंपराओं का तर्कों द्वारा वर्णन आया है। अर्जुन को उस कृपण स्थिति में रोते…

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