सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग- श्रीमद् भगवदगीता
सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…
सोलहवाँ अध्यायः दैवासुरसंपद्विभागयोग इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी…