June 24, 2024

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Vishwakarma Aarti – श्री विश्वकर्मा प्रभु भगवान

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु भगवान

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा|
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा||

 आदि सृष्टि मे विधि को श्रुति उपदेश दिया|
जीव मात्रा का जाग मे, ज्ञान विकास किया||

 ऋषि अंगीरा ताप से, शांति नहीं पाई|
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रया लीना|
संकट मोचन बनकर डोर दुःखा कीना||
जय श्री विश्वकर्मा.

 जब रथकार दंपति, तुम्हारी टर करी|
सुनकर दीं प्रार्थना, विपत हरी सागरी||

 एकानन चतुरानन, पंचानन राजे|
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे||

 ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे|
मन द्विविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे||

 श्री विश्वकर्मा की आरती जो कोई गावे|
भाजात गजानांद स्वामी, सुख संपाति पावे||
जय श्री विश्वकर्मा.

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Vishwakarma Aarti in Hindi Lyrics को हमने ध्यान पूर्वक लिखा है, फिर भी इसमे किसी प्रकार की त्रुटि दिखे तो आप हमे Comment करके या फिर Swarn1508@gmail.com पर Email कर सकते है। 

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